C. Specific Identity of Jharkhand / झारखंड की विशिष्ट पहचान- 2. Cultural Status of Jharkhand / झारखण्ड की सांस्कृतिक स्थिति | FREE GS2 Book Notes sample

2. Cultural Status of Jharkhand (1 question)

  • Tribals are nature worshipers. Their festivals are also related to nature.
  • The two major festivals of the tribes of Jharkhand are ‘Sarhul and Karam. Nature is worshiped in them. Nature is also given paramount position in other festivals.
  • Festivals and events like Namkaran (नामकरण), Gotra Bandhan (गोत्रबंधन) and marriages are also inspired by nature.
  • Worshipping rituals of each tribe of Jharkhand are performed according to their traditional methods. They mainly worship the Matra devi (मातृदेवी) and Pitra devta (पितर देवता).
  • A large number of tribes here worship according to the practices of the original Sarna dharm (सरना धर्म).
  • The tribes of Jharkhand differ in their rites of the deceased (मृतक-संस्कार). Here different tribes perform deceased rites in different ways. There are mainly two ways in which it is performed. In some the deceased is burnt while in others the deceased is buried in the ground.
  • ** The tribal family of Jharkhand is patriarchal. Each tribe is divided into several gotras. Each gotra has its own gotra-mark, called totem, which is usually named after……………

(ख) झारखण्ड की सांस्कृतिक स्थिति (1 question)

  • आदिवासी प्रकृति पूजक होते हैं। उनके पर्व-त्योहार भी प्रकृति से ही जुड़े होते हैं।
  • झारखण्ड की जनजातियों के दो बड़े त्यौहार ‘सरहुल और करमा हैं। इनमें प्रकृति की उपासना की जाती है। अन्य त्यौहारों में भी प्रकृति को सर्वोपरि स्थान दिया जाता है। 
  • नामकरण, गोत्रबंधन एवं शादी-ब्याह जैसे उत्सव भी प्रकृति से प्रेरित होते हैं।
  • झारखण्ड की प्रत्येक जनजाति की पूजा-पद्धति अपने परंपरागत विधि-विधान के अनुसार निर्धारित होती है। इनमें मुख्यतः मातृदेवी और पितर देवता की पूजा होती है। 
  • यहां की जनजातियों की एक बड़ी संख्या मूल सरना धर्म की प्रथाओं के अनुसार पूजा-अर्चना करती है। 
  • झारखण्ड की जनजातियों में मृतक-संस्कार में भिन्नता पायी जाती है। यहां अलग-अलग जनजातियां भिन्न-भिन्न तरीकों से मृतक संस्कार करती हैं। इस क्रिया में मुख्यतः दो तरीके प्रचलित हैं। कहीं मृतक को जलाया जाता है .कहीं मृतक को मिट्टी में दफना दिया जाता है.
  • *झारखण्ड का जनजातीय परिवार पितृसत्तात्मक है। प्रत्येक जनजाति कई गोत्रों में विभक्त है। प्रत्येक गोत्र का अपना गोत्र-चिन्ह होता है, जिसे टोटम कहा जाता है, जो टोटम सामान्यतः पशु-पक्षी या……………………..