General Studies 1 (GS1) D. Economic and Sustainable Development / आर्थिक और सतत विकास – 2. Sustainable Development And Economic Issues / सतत विकास और आर्थिक मुद्दे | FREE GS2 Book Notes sample

2. Sustainable Development And Economic Issues (4 questions) 

2.1 Indian Finance System 

Money Market

  • It is used for short-term credit.
  • Generally, we use it for borrowing and lending of money up to 1 year.
  • It includes Reserve Bank of India,………………………………..
  • ………………………………..
  • ………………………………..
  • ……………………………….. 

Capital Market

  • It is used for long-term credit.
  • Generally, we use it for borrowing and lending of money above 1 year.
  • It includes Stock exchanges, Housing finance companies, Insurance companies etc.
  • All the institutions listed in the capital market are called Non-banking financial companies (NBFCs). But it is.

 

2. सतत विकास और आर्थिक मुद्दे (4 questions)

2.1. भारतीय वित्त प्रणाली

  • भारतीय वित्त प्रणाली एक ऐसी व्यवस्था से है जिसमें व्यक्तियों, वित्तीय संस्थाओं, बैंकों, औद्योगिक कम्पनिओं तथा सरकार द्वारा वित्त की माँग होती है तथा इसकी पूर्ति की जाती है।
  • भारतीय वित्त प्रणाली के दो पक्ष है- पहला माँग पक्ष तथा दूसरा पूर्ति पक्ष।
  • माँग पक्ष का प्रतिनिधित्व व्यत्तिगत निवेशक, औद्योगिक तथा व्यापारिक कम्पनिओं, सरकर आदि करते है, जबकि पूर्ति पक्ष का प्रतिनिधित्व बैंक, बिमा कंपनी, म्यूच्यूअल फण्ड, तथा अन्य वित्तीय संस्थाएं करती है। 
  • वित्तीय प्रणाली के घटक: एक वित्तीय प्रणाली का अर्थ उस प्रणाली से है जो निवेशकों और उधारकर्ताओं के बीच पैसे के हस्तांतरण को सक्षम बनाती है। एक वित्तीय प्रणाली को एक अंतरराष्ट्रीय, क्षेत्रीय या संगठनात्मक स्तर पर परिभाषित किया जा सकता है।  “वित्तीय प्रणाली” में “प्रणाली” शब्द एक जटिल समूह को संदर्भित करता है और अर्थव्यवस्था के अंदर संस्थानों, एजेंटों, प्रक्रियाओं, बाजारों, लेनदेन, दावों से नजदीकी रूप से जुडा होता है। वित्तीय प्रणाली के पांच घटक हैं, जिनका विवरण निम्नवत् है:
  • वित्तीय संस्थान: यह निवेशकों और बचत कर्ताओं को मिलाकर वित्तीय प्रणाली को गतिमान बनाये रखते हैं। इस संस्थानों का मुख्य कार्य बचत कर्ताओं से मुद्रा इकठ्ठा करके उन निवेशकों को उधार देना है जो कि उस मुद्रा को बाजार में निवेश कर लाभ कमाना चाहते है अतः ये वित्तीय संस्थान उधार देने वालों और उधार लेने वालों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाते हैं I इस संस्थानों के उदहारण हैं :- बैंक, गैर बैंकिंग वित्तीय संस्थान, स्वयं सहायता समूह, मर्चेंट बैंकर इत्यादि हैं I